देश के सैनिक हैं हम - कविता Desh ke sainik Hain ham - poem

 देश के सैनिक हैं हम - कविता 

Desh ke sainik Hain ham - poem



देश के सैनिक है हम

देश के रक्षक हैं हम



न डर हमें किसी दुश्मन का

न डर हमें किसी भक्षक का 

 डटे रहें सरहद पर

खड़े रहें हर मोर्चे पर



जब हम ललकार लगाएं। 

दुश्मन डरकर भाग जाएं 

जब हम बंदूक उठाएं 

दुश्मन को मार भगाएं।



शांति के दूत हैं हम

शत्रु के काल हैं हम 

देश के सैनिक है हम

देश के रक्षक हैं हम 










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