पहेलियाँ / Riddles

 पहेलियाँ / Riddles 

दो पंक्तियों की 50 हिंदी पहेलियाँ

50 two-line riddles in Hindi




पंख नहीं पर उड़ती जाऊँ,

हाथ न आए, आगे बढ़ती जाऊँ।

👉 समय

बिना मुँह के सब कुछ बोले,

ज्ञान के ताले पल में खोले।

👉 पुस्तक

दाँत बहुत पर खाना न खाए,

सबके बाल सदा सुलझाए।

👉 कंघी

चलता हूँ पर पैर नहीं,

रुकता हूँ पर ठहर नहीं।

👉 नदी

चार पैर पर चल न पाऊँ,

सबको बैठा मैं सुहाऊँ।

👉 कुर्सी

काला घोड़ा लाल लगाम,

खाते ही सब बोले राम।

👉 मिर्च

खुद जले जग को उजियारा,

अँधियारे का बने सहारा।

👉 मोमबत्ती

एक थाल मोती से भरा,

सबके सिर पर औंधा धरा।

👉 आकाश

पानी पीकर जीवित रहता,

धरती माँ का गहना कहलाता।

👉 पेड़

दिन में सोए रात जगाए,

घर-घर का पहरेदार कहलाए।

👉 ताला

हाथ न पैर फिर भी दौड़े,

सबके जीवन पल में जोड़े।

👉 घड़ी

बिना पंख मैं उड़ जाती,

दूर देश की खबर सुनाती।

👉 चिट्ठी

जो देखो वह मैं दिखलाऊँ,

झूठ-सच सब रूप बताऊँ।

👉 दर्पण

जल में रहूँ जल की रानी,

बिना मेरे सूनी कहानी।

👉 मछली

हरा-भरा पर पेड़ नहीं,

मीठा बहुत पर फल नहीं।

👉 गन्ना

राजा हूँ फलों का प्यारा,

गर्मी में लगता न्यारा।

👉 आम

बिना हाथ के लिखता जाऊँ,

सबका लेखा मैं बतलाऊँ।

👉 पेंसिल

दो बहनें साथ-साथ आएँ,

दिन-रात का भेद बताएं।

👉 सूरज–चाँद

डोर से मैं उड़ता जाऊँ,

बच्चों का मन खूब लुभाऊँ।

👉 पतंग

बाहर सख्त भीतर पानी,

बताओ मेरी यही कहानी।

👉 नारियल

आँखें हैं पर देख न पाऊँ,

सबको राह सही दिखलाऊँ।

👉 चश्मा

चार चक्के मेरी शान,

सड़क-सड़क मेरी पहचान।

👉 बस

बोल न सकूँ फिर भी गाऊँ,

खुशी में सबको नचाऊँ।

👉 ढोल

बिना पैर के चलता जाऊँ,

घर-घर रोशनी पहुँचाऊँ।

👉 बिजली

हरी डाली लाल है फल,

खाते ही आ जाए हलचल।

👉 मिर्च

मैं खड़ा पर चलता नहीं,

सबका बोझा सहता वहीं।

👉 पुल

दो सखियाँ सदा संग रहतीं,

एक बिना दूजी न चलती।

👉 चप्पल

बिना हाथ के काम कराऊँ,

दुनिया भर को मैं घुमाऊँ।

👉 कंप्यूटर

न रंग मेरा न आकार,

फिर भी हूँ सबका आधार।

👉 हवा

छोटा सा घर मेरा नाम,

अक्षर रहते आठों याम।

👉 कलमदान

जंगल का मैं राजा कहलाऊँ,

दहाड़ूँ तो सबको डराऊँ।

👉 शेर

मीठा-मीठा रस से भरा,

बच्चों का मैं मित्र बड़ा।

👉 शहद

काली-काली रात बनाऊँ,

दिन में सबको राह दिखाऊँ।

👉 सड़क

गोल-मोल मैं घूमता जाऊँ,

दुनिया की सैर कराऊँ।

👉 पहिया

पानी से निकला मेरा रूप,

धूप लगे तो दूँ मैं धूप।

👉 बादल

पढ़-लिख कर मैं काम बनाऊँ,

भविष्य का दीप जलाऊँ।

👉 विद्यालय

सीने में दिल धड़काता,

जीवन का संगीत सुनाता।

👉 दिल

बिना सुर के मैं बज जाऊँ,

हर घर में आवाज लगाऊँ।

👉 घंटी

फूलों पर मैं रोज मँडराऊँ,

रंग-बिरंगे पंख दिखाऊँ।

👉 तितली

रात में आँगन चमकाऊँ,

दिन में कहीं खो जाऊँ।

👉 तारे

ठंड लगे तो काम में आऊँ,

गर्मी में दूर भगाऊँ।

👉 स्वेटर

लिखूँ मिटाऊँ फिर लिख जाऊँ,

ज्ञान का राही कहलाऊँ।

👉 स्लेट

जल का मैं भंडार कहाऊँ,

सबकी प्यास बुझाऊँ।

👉 नदी

बिना बोले सब समझाए,

मन का भाव तुरंत बताए।

👉 चित्र

छोटा सा पर काम बड़ा,

ताले का मैं साथी सदा।

👉 चाबी

सुबह-सुबह मैं शोर मचाऊँ,

सबको नींद से मैं जगाऊँ।

👉 मुर्गा

मीठी बोली सबको भाए,

घर-घर खुशबू फैलाए।

👉 फूल

पढ़ने में जो काम आए,

ज्ञान का दीप जलाए।

👉 पुस्तक

हरी-भरी मैं सबको भाऊँ,

भोजन में स्वाद बढ़ाऊँ।

👉 धनिया

रंग-बिरंगा तन मेरा,

बच्चों का हूँ मित्र घनेरा।

👉 गुब्बारा



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