8.10.2 कक्षा- 8, एनसीईआरटी हिंदी पुस्तक 'मल्हार'
अध्याय- 10, तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)
Class- 8, NCERT Hindi Malhaar
Chapter- 10, Tarun ke Swapan
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शब्दार्थ –
पाठ से
मेरी समझ से
निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?(क) सुभाषचंद्र बोस के लिए(ख) देश के तरुण वर्ग के लिए(ग) चित्तरंजन दास के लिए(घ) भारतवासियों के लिएउत्तर:(ख) देश के तरुण वर्ग के लिए
(ख) स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा—(क) आर्थिक असमानता से(ख) स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से(ग) श्रम और कर्म की मर्यादा से(घ) जातिभेद सेउत्तर:(ग) श्रम और कर्म की मर्यादा से
3.“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?(क) हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है(ख) हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है(ग) उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है(घ) उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है।उत्तर:(ग) उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
4. जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब-(क) राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी(ख) तरुणों का साहस बढ़ेगा(ग) राष्ट्र स्वाधीन बनेगा(घ) राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगाउत्तरः(ख) तरुणों का साहस बढ़ेगा
मिलकर करें मिलाननीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव – विचार से सही मिलान कीजिए ।उत्तर :1. - 22.- 33. - 1
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए । आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए ।
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा ।”(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो ।”उत्तर:(क) सुभाषचंद्र बोस ने एक ऐसा स्वाधीन संपन्न समाज और राष्ट्र का स्वप्न देखा जिसमें प्रत्येक जन को समान अधिकार मिले। जहाँ हर व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उचित अवसर व संसाधन उपलब्ध हों। आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर देश बनाना चाहिए। स्वतंत्रता और राष्ट्र की उन्नति के लिए आर्थिक और सामाजिक समानता आवश्यक हैं।
(ख) नेताजी ने अपनी मातृभूमि को साम्राज्यवादी ब्रिटिश शासन के बंधन से मुक्त कराने हेतु स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न और आदर्श विचारधारा को अपनाने के लिए युवा वर्ग को प्रेरित किया। नेताजी के राजनीतिक गुरु देशबंधु चित्तरंजन दास महान विचारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनसे प्रेरणा लेते हुए नेताजी ने देश में आजादी की लड़ाई को दिशा दी। देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वप्न शक्ति का स्रोत और आनंद का आधार बना।
(ग) ‘उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो’, इस कथन का अर्थ है कि समाज में समानता हो । सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक स्तर पर हर भारतीय अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो। भारतवर्ष की आज़ादी और उन्नति में समाज समान रूप से भागीदार बने । जातिभेद समाप्त हो और नारी सशक्तिकरण हो ।
सोच-विचार के लिए
अब आप इस पाठ को पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-
(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था ?उत्तर:नेताजी ने सुखी, समृद्ध, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था। ऐसा भारत जिसमें सामाजिक समानता हो, स्वदेशी उद्योग मजबूत हो और सभी दृष्टियों से मुक्त समाज राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे।
(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा ?उत्तर:सुभाषचंद्र बोस ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में एक प्रमुख नेता थे। उन्होंने अपने विचारों और आदर्शों से देश के युवाओं को नई दिशा दी। अंग्रेजों से देश को स्वतंत्र कराना उनके जीवन का लक्ष्य था । राष्ट्र के निर्माण में श्रम, त्याग और बलिदान को जीवन की सार्थकता के रूप में देखा।
(ग) “ आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?उत्तर:सुभाषचंद्र बोस ने ऐसे स्वाधीन संपन्न समाज और राष्ट्र का सपना देखा था जिसमें हर व्यक्ति राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बने। वे देश के युवाओं में देश के लिए प्रेम, मेहनत, त्याग और समर्पण की भावना कूट-कूटकर भरना चाहते थे । देश की उन्नति के लिए श्रम और कर्म का महत्व हो जिसमें आलसी, भ्रष्टाचारी और अकर्मण्य लोगों के लिए स्थान नहीं होना चाहिए ।
(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या – क्या कर सकती है?उत्तर:सुभाषचंद्र बोस के जीवन से प्रेरणा लेकर आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता, समानता और राष्ट्रभक्ति के सच्चे मूल्यों को अपनाना चाहिए। उनके व्यक्तित्व और विचारों से प्रेरणा लेकर आज युवाओं को समाज और देश के उत्थान के लिए अग्रसर होना चाहिए। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” के नारे से प्रत्येक भारतीय के दिल से देशभक्ति की भावना जाग्रत होती है। युवाओं को व्यक्तिगत स्वार्थों को त्यागकर राष्ट्र को अपना पूरा जीवन समर्पित करना, समाज के उत्थान और राष्ट्र की स्वाधीनता को सर्वोपरि रखने के कार्य करने का प्रयास करना चाहिए।
भाषा की बात सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए
अखंडसत्यजीवनसंपन्नसमाजअसीमशक्तिराष्ट्रअपारआनंद
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