6.1.2 कक्षा 6, एनसीईआरटी हिंदी पुस्तक 'मल्हार' अध्याय 1 मातृभूमि 6.1 Class -6, NCERT Hindi Malhaar MatriBhoomi

 6.1.2 कक्षा 6, एनसीईआरटी हिंदी पुस्तक 'मल्हार' 

अध्याय 1 मातृभूमि 

6.1 Class -6, NCERT Hindi Malhaar  

MatriBhoomi 


  प्रश्नों के उत्तर 


🧠 मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

1. हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?

चरण

वंशी

हिमालय

सिंधु

उत्तर: ★ सिंधु 


2. मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से—

भारत की प्रशंसा की गई है।

भारत के महापुरुषों की जय की गई है।

भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।

भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।

उत्तर: ★ भारत की प्रशंसा की गई है। 


(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर:

प्रश्न 1: कविता में कवि ने हिंद महासागर को 'सिंधु' कहा है, जो उसका प्राचीन नाम है। 

प्रश्न 2: कविता में भारत के पर्वतों, नदियों, वृक्षों, मलय पवन, घनी अमराइयों आदि की चर्चा अधिक की गई है, जिससे भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है। 


 मिलकर करें मिलान

प्रश्न: पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें उनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। 


1 - 10 

2- 4 

3- 6 

4- 8

5- 3 

6- 5

7- 2 

8- 9

9- 7 

10- 1 

 

      शब्द    -      अर्थ या संदर्भ 

1. हिमालय- भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत माला।

2. त्रिवेणी- तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।

3. मलय पवन- दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।

4. सिंधु- समुद्र, एक नदी का नाम।

5. गंगा-यमुना - भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।

6. रघुपति- श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।

7. श्रीकृष्ण- वसुदेव के पुत्र वासुदेव।

8. सीता- जनक की पुत्री जानकी।

9. गीता- एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ 'श्रीमद्भगवद्गीता', जिसमें श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच संवाद है।

10. गौतम- बुद्ध एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।


💭 सोच-विचार के लिए

(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

1. कोयल कहाँ रहती है?

उत्तर: कोयल अमराइयों में रहती है। 

2. तन-मन कौन सँवारती है?

उत्तर: बहती मलय पवन हमारा तन-मन सँवारती है। 

3. झरने कहाँ से झरते हैं?

उत्तर: झरने पहाड़ियों से झरते हैं। 

4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?

उत्तर: श्रीकृष्ण ने मधुर बाँसुरी बजाकर सबका मन मोह लिया और गीता का संदेश भी दिया। 

5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?

उत्तर: गौतम बुद्ध ने भारत का यश बढ़ाया और संसार को अहिंसा, दया एवं करुणा का संदेश दिया। 


(ख) “नदियाँ लहर रही हैं / पग पग छहर रही हैं” — इन पंक्तियों में 'लहर' और 'छहर' शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

लहर: पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश। 

छहर: बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना।


मिलान करें 

स्तंभ 1 (काव्य पंक्तियाँ) स्तंभ 2 (भावार्थ/अर्थ)

1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी

 2. मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है, वह भूमि मेरी माँ के समान है।

2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में

 1. यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।

3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है

 3. वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं

-----

शब्दों के रूप

(क) नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ लिखिए—

1. घर-घर: प्रत्येक घर। 

2. बाल-बाल: हर बाल (बच्चा) या सिर के प्रत्येक  बाल। 

3 साँस-साँस: प्रत्येक श्वास या हर घड़ी।

4 देश-देश: प्रत्येक देश या जगह-जगह।

5 पर्वत-पर्वत: प्रत्येक पर्वत या हर पहाड़।


अभ्यास (ख):

 'भूमि' शब्द जोड़कर नए शब्द और उनके अर्थ

संकेत में दिए गए शब्दों के आधार पर कुछ नए शब्द और उनके अर्थ इस प्रकार हैं:

नया शब्द अर्थ

जन्मभूमि वह स्थान जहाँ जन्म हुआ हो।

देवभूमि देवताओं की भूमि (अक्सर उत्तराखंड के लिए प्रयुक्त)।

कर्मभूमि वह स्थान जहाँ मनुष्य अपना कार्य या कर्तव्य करता है।

रणभूमि युद्ध का मैदान।

तपोभूमि वह स्थान जहाँ तपस्या की गई हो।

भारतभूमि भारत की पावन धरती।

मरुभूमि रेगिस्तान या रेतीली ज़मीन।

सिद्धभूमि वह स्थान जहाँ सिद्धियों की प्राप्ति हो।  

-----

शब्दजाल (वाद्यों के नामों का शब्द-जाल)

अलगोजा, बीन, बाँसुरी, सींगी, शहनाई, नादस्वरम, भंकोरा, शंख 

आज की पहेली 

हिमालय, गंगा, भारत, कलियाँ, पवन

------------

वंदे मातरम् 

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

हे माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!

सुजलाम्, सुफलाम्,

तुम जल से भरी हुई हो, फलों से परिपूर्ण हो,

मलयज शीतलाम्,

तुम्हें मलय से आती हुई पवन शीतलता प्रदान करती है,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

तुम अन्न के खेतों से परिपूर्ण वंदनीय माता हो!

वंदे मातरम्!

हे माँ मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,

जिसकी रमणीय रात्रि को चंद्रमा का प्रकाश शोभायमान करता है,

फुल्ल्कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

जो खिले हुए फूलों के पेड़ों से सुसज्जित है,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सदैव हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

सुख देने वाली, वरदान-देने वाली माँ,

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!

 

https://knowindia.india.gov.in/hindi/national-identity-elements/ national-song.php






Comments